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अभी-अभी : कांग्रेस को लगा एक और बड़ा झटका, अब क्‍या करेंगे राहुल गांधी?

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है। दरअसल पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने बुधवार को कहा कि वह महापौर पदों के उम्मीदवारों के चयन में राज्य सरकार और पार्टी द्वारा उनकी राय नहीं लिए जाने से बहुत आहत हैं। सिद्धू के साथ 15 नगरपालिका पार्षद अमृतसर मेयर के चुनाव के आधिकारिक कार्यक्रम से मंगलवार को दूर रहे थे जिससे कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो गई थी और पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ को इस संबंध में एक रिपोर्ट मांगनी पड़ी।

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भारतीय जनता पार्टी छोड़कर पिछले वर्ष कांग्रेस में शामिल हुए सिद्धू ने बुधवार को एक बयान में कहा कि हालांकि वह स्थानीय निकाय मंत्री है और वह इस मामले में किसी स्तर पर निर्णयों में शामिल नहीं रहे। उन्होंने कहा कि मैं न तो पटियाला, जालंधर और अमृतसर के महापौरों के चुनाव के सिलसिले में पिछले एक महीने से सरकार के स्तर पर चले विचार विमर्श में शामिल रहा और न ही पार्टी के स्तर पर इस संबंध में मुझसे कोई राय ली गई।

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भाजपा के पूर्व सांसद सिद्धू ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को करमजीत सिंह रिंतू के अमृतसर के महापौर के रूप में निर्वाचित होने के खिलाफ उन्हें कोई समस्या नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इससे मुझे और मेरी भावनाओं को ठेस पहुंची है। मैं इसमें किसी भी स्तर पर शामिल नहीं रहा हूं।

कांग्रेस ने तीन कैबिनेट मंत्रियों त्रिप्त राजिन्दर बाजवा, अरुणा चौधरी और साधु सिंह धर्मसोत को क्रमश: अमृतसर, जालंधर और पटियाला नगर निगमों के महापौर चुनावों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। अमृतसर महापौर चुनाव कार्यक्रम से दूर रहने पर उन्होंने कहा कि मुझे अमृतसर महापौर के निर्वाचन के लिए सही तरीके से आमंत्रित तक नहीं किया गया। इसलिए मैं बैठक में शामिल नहीं हुआ।

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इस बीच पंजाब कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता और विधायक राजकुमार वर्का ने कहा कि सिद्धू के साथ सभी विधायकों ने मेयर के चुनाव पर निर्णय लेने के लिए एक प्रस्ताव में मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था। उन्होंने कहा कि अमृतसर महापौर चुनाव के कार्यक्रम का प्रबंध उनके विभाग ने किया था न कि पार्टी ने। उन्होंने कहा कि कुछ संवादहीनता हो सकती है जिस कारण यह स्थिति पैदा हुई।

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