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इन राशि वालों पर शुरू हो चुकी है शनि की साढ़ेसाती, फिर भी मिलेगा राजयोग

26 अक्‍टूबर से शनि वृश्चिक से निकल कर धनु राशि में प्रवेश कर चुके हैं। जहाँ तुला राशि वालों की साढेसाती समाप्त हो गई है, वहीं मकर राशि वालों पर शुरू हो गई है। जबकि वृश्चिक और धनु राशि पर अब भी साढ़ेसाती चलती रहेगी। वहीं मेष और सिंह राशि पर से अढैया भी समाप्त हो गई है। लेकिन वृषभ और कन्या राशि पर शुरूआत हुई है।

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अक्‍सर लोग शनि की ढैया और साढ़ेसाती का नाम सुनकर ही घबरा जाते हैं। लेकिन वास्‍तव में कभी-कभी ऐसे योग भी बन जाते हैं जिसमें शनि की ढैया या साढ़ेसाती के साथ ही व्‍यक्ति को राजयोग भी मिल जाता है। जी हां, विद्वान ज्योतिषशास्त्रियों की मानें तो शनि सभी व्यक्तियों के लिए कष्टकारी नहीं होते हैं। शनि की दशा के दौरान बहुत से लोगों को अपेक्षा से बढ़कर लाभ-सम्मान व वैभव की प्राप्ति होती है।

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कुछ लोगों को शनि की इस दशा के दौरान काफी परेशानी एवं कष्ट का सामना करना पड़ता है। देखा जाए तो शनि केवल कष्ट ही नहीं देते बल्कि शुभ और लाभ भी प्रदान करते हैं। हम विषय की गहराई में जाकर देखें तो शनि का प्रभाव सभी व्यक्ति पर उनकी राशि कुण्डली में वर्तमान विभिन्न तत्वों व कर्म पर निर्भर करता है। अत: शनि के प्रभाव को लेकर आपको भयग्रस्त होने की जरूरत नहीं है। आइये हम देखें कि शनि किसी के लिए कष्टकर और किसी के लिए सुखकारी तो किसी को मिश्रित फल देने वाला कैसे होता है।

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दरअसल शनि की स्थिति का आंकलन सबसे जरूरी होता है। अगर आपका लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर अथवा कुम्भ है, तो शनि आपको नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, बल्कि आपको उनसे लाभ व सहयोग मिलता है। इस तरह के अलावा जो अन्‍य लग्न हैं उनमें जन्म लेने वाले व्यक्ति को शनि के कुप्रभाव का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिर्विद बताते हैं कि साढ़ेसाती का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए चन्द्र राशि के अनुसार शनि की स्थिति ज्ञात करने के साथ लग्न कुण्डली में चन्द्र की स्थिति का आंकलन करना भी जरूरी होता है। यह ज्योतिष का गूढ़ विषय है जिसका उत्तर कुण्डली में ढूंढा जा सकता है। साढ़े साती के प्रभाव के लिए कुण्डली में लग्न व लग्नेश की स्थिति के साथ ही शनि और चन्द्र की स्थिति पर भी विचार किया जाता है।

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