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… तो क्या राष्‍ट्रपति ने मान ली पीएम मोदी की बात, देश में इसी साल होंगे लोकसभा चुनाव?

नई दिल्‍ली। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट सत्र की शुरूआत से पहले आज अपना पहला अभिभाषण दिया। इस दौरान राष्‍ट्रपति ने देश में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव 2018 में ही कराए जाने पर सबसे बड़े संकेत भी दिए। दरअसल अभी तक का सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्‍या मोदी सरकार देश में इसी साल आम चुनाव कराने के पक्ष में है?

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क्या एक साथ चुनाव की जो बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते आए हैं, उसे वे इस साल के आखिर में काफी हद तक लागू भी कर सकते हैं? दरअसल राष्ट्रपति का आज का अभिभाषण और सरकार से मिल रहे संकेतों को कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियां अब डिकोड करने में लगी हैं और उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

आज बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने पहले अभिभाषण में जब सरकार की पिछले पौने चार साल की उपलब्धियां गिनाईं, तो उसमें एक साथ चुनाव की पीएम मोदी की बात दोहराई। राष्ट्रपति ने एक साथ चुनाव की वकालत करते हुए कहा कि हर समय चुनाव का असर विकास पर पड़ता है।

आपको बता दें कि 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने भी समय से पहले लोकसभा चुनाव कराया था। लेकिन बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी। अब एक बार फिर देश की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी अटल की राह पर कदम बढ़ाने के मूड में नजर आ रहे हैं।

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बीजेपी पिछले कुछ समय से केंद्र और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की बात कहती आई है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों दिए अपने एक इंटरव्यू में इसकी पुरजोर वकालत की थी। पीएम मोदी का तर्क था कि भारत जैसे विशाल देश में हर समय किसी न किसी प्रदेश में चुनाव चल रहे होते हैं और आचार संहिता लगी होती है जिसके चलते विकास के काम रुक जाते हैं।

इसके अलावा केंद्र व राज्य के अलग-अलग चुनाव कराने से संसाधनों का भी काफी खर्च होता है जिसे बचाया जा सकता है। इस साल के अंत में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। जबकि इसी साल अप्रैल में कर्नाटक और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं अगले साल 2019 में आंध्र प्रदेश, अरुणांचल, उड़ीसा, सिक्किम, महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के विधानसभा चुनाव होने हैं।

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ऐसे में विपक्षी दलों को लगता है कि नरेंद्र मोदी अपनी रणनीति से एक बार फिर विपक्ष को चौंका सकते हैं और केंद्र के चुनाव भी इन राज्यों के साथ कराकर अपने खिलाफ किसी बड़े माहौल के बनने से पहले ही जीत हासिल कर दोबारा सत्ता का काबिज होने का दांव चल सकते हैं।

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