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बड़ी खबर : 2019 में बीजेपी ले सकती है बड़ा फैसला, इन दिग्गज नेताओं का कटेगा टिकट!

नई दिल्ली। बीजेपी 2014 का लोकसभा चुनाव सरकार बनाने के लिए लड़ी थी। 2019 का लोकसभा चुनाव सरकार को बचाने व बनाये रखने के लिए लड़ेगी। इसमें नया क्या है ? नया यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग दर्जन भर राज्यों में बीजेपी ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया था।

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लोकसभा चुनाव के लिहाज से राज्यों में सर्वेक्षण का काम चल रहा है और यह अनुमान है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार उसकी सीटें घट सकती हैं। इसमें उत्तर भारत के लगभग सारे राज्य शामिल हैं। गुजरात, राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में पिछली बार बीजेपी ने अधिकतम सीटें जीती हैं।

जबकि अगले चुनाव में इन राज्यों में सभी सीटें बचाए रखना पार्टी को संभव नहीं लग रहा है। ऐसे में भारी संख्या में मौजूदा सांसदों के टिकट कटने की संभावना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार असफल सांसदों के अलावा असंतुष्ट सांसदों में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और शांता कुमार सरीखे और भी कई नेताओं का नाम शायद बीजेपी की तालिका में देखने को नही मिले। इन आधा दर्जन नेताओं को हिमाचल प्रदेश व गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार से भी दूर रखा गया है। जबकि लाल कृष्ण आडवाणी गुजरात से ही लोकसभा के सदस्य हैं।

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ये भी है तैयारी

जीती हुई सभी सीटें बचाए रखना बीजेपी को संभव नहीं लग रहा है। इसी रणनीति के तहत नए और पुराने क्षत्रपों को साथ लिया जा रहा है ताकि सीटों की भरपाई की जा सके। ऐसे में बीजेपी में अन्य दलों के क्षत्रपों को पार्टी से और अन्य क्षेत्रीय दलों को एनडीए से जोड़ने की कवायद शुरू भी हो गई है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पंडित सुखराम और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय को इसी कवायद के तहत पार्टी से जोड़ा गया है।

वहीं नीतीश कुमार के जदयू को एनडीए में सरीक किया गया है। अकेले नीतीश कोई ताकत नहीं हैं, पर यह हकीकत है कि वह जिसकी तरफ रहेंगे, उसी के पक्ष में पलड़ा झुकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीएमके (द्रमुक) सुप्रीमो एम करुणानिधि से मुलाकात भी इसी कवायद का हिस्सा था। दरअसल, मोदी वह गलती नहीं करना चाहते जो 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी और उनकी टीम ने किया था। अगर उस समय वाजपेयी सिर्फ तमिलनाडु में करुणानिधि को साथ रखते तो उनकी सरकार दोबारा बन सकती थी।

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तमिलनाडु में सहयोगी बदलना बीजेपी को भारी पड़ गया था। सो इस बार बीजेपी इस पर खास नजर रख रही है। पार्टी के कई नेता मान भी रहे हैं कि इस बार तमिलनाडु में पासा पलटने वाला है। इसलिए अभी से डीएमके से दोस्ती बढ़ाई जा रही है। इसी तरह इस सरकार में तो के चंद्रशेखर राव की पार्टी नहीं शामिल हो पाई है, लेकिन अगले चुनाव के बाद उनके एनडीए की सरकार में आने की पूरी संभावना है। अब ऐसे ही सहयोगी की तलाश बीजेपी को झारखंड में है, तभी नए सिरे से बाबूलाल मरांडी से बात होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि बीजेपी पहले एनडीए में सहयोगी रही सभी पार्टियों के संपर्क में है और उनको ध्यान में रख कर लोकसभा चुनाव की रणनीति बना रही है।

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