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बीजेपी की बड़ी मुश्किल, अब आयात किए नेताओं से चलाना पड़ रहा काम

Modi-AmitShahनोएडा। पश्चिमी यूपी के गुर्जर बाहुल्य विधानसभा क्षेत्रों में हालात ये हैं कि बीजेपी को चुनाव प्रचार करने के लिए दिल्ली और हरियाणा से नेता आयात करने पड़ रहे हैं। इस राज्य में बीजेपी के पास हुकुम सिंह और रविंद्र भड़ाना को छोड़कर अन्य कोई तीसरा गुर्जर नेता नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ रविंद्र भड़ाना को स्टार प्रचारकों की लिस्ट में बीजेपी ने तरजीह नहीं दी है। ऐसे में बीजेपी को चुनाव प्रचार के लिए नए चेहरों का सहारा लेना पड़ा रहा है।

आकंड़ो की मानें तो सहारनपुर से बुलंदशहर तक के इलाके में गुर्जर वोटर्स का दबदबा है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव के जरिए इस इलाके से बीजेपी के 12 विधायक चुने गए थे। इनमें पार्टी से 2 गुर्जर विधायक थे। उस समय हुकुम सिंह ने कैराना और रविंद्र भड़ाना ने मेरठ से अपना लोहा मनवाया था। हालांकि, इसके बाद भी जिले में हुए पार्टी के कार्यक्रमों में बाहर के चेहरों को तवज्जों दी गई है।

पिछले साल जब नोएडा में परिवर्तन यात्रा शुरू हुई तो बीजेपी के फरीदाबाद सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने इसमें हिस्सा लिया। वहीं, बीजेपी की दादरी में पब्लिक मीटिंग हुई तो उसमें दिल्ली के सांसद रमेश विधूड़ी को बुलाया गया था। रमेश विधूड़ी इस समय भी नोएडा में सक्रिय हैं। उन्होंने शनिवार को भी नोएडा सीट के पार्टी उम्मीदवार पंकज सिंह के लिए कई इलाकों में प्रचार किया। यही नहीं, अब जब स्टार प्रचारकों की सूची आई है तो उसमें हुकुम सिंह के अलावा अवतार सिंह भड़ाना के नाम ही रखे गए हैं।

रमेश विधूड़ी और कृष्णपाल गुर्जर का नाम इस सूची में नहीं है, जबकि अवतार सिंह भड़ाना कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं। वह फरीदाबाद में कृष्णपाल गुर्जर के प्रतिद्वंदी भी रहे हैं। बीजेपी में गुर्जर वोटों पर नजर रखने वाले हरिश्चंद्र भाटी का कहना है कि इस बार पार्टी ने सात गुर्जर नेताओं को टिकट दिया है। गुर्जर नेताओं को आगे बढ़ाने से पार्टी को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बीजेपी में अपने ही गुर्जर नेताओं की जड़ काटने में लगे हैं। आपसी खींचतान में किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा। यही कारण है कि दूसरे राज्यों से नेता बुलाने पड़ रहे हैं। यूपी में वोटर्स को आकर्षित करने वाले गुर्जर नेताओं की कमी नहीं है।

बीजेपी ने गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर में सिर्फ दो गुर्जरों को ही टिकट दिए हैं। इनमें लोनी से नंद किशोर गुर्जर और दादरी से तेजपाल सिंह नागर पर दांव लगाया गया है। वहीं, सपा ने जिले में ही दो गुर्जर प्रत्याशियों को टिकट देकर गुर्जर वोटरों को अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाई है। सपा के साथ गठबंधन में उतरी कांग्रेस ने भी अपने हिस्से की दादरी सीट से पूर्व विधायक समीर भाटी को उतारा है। दूसरी ओर, बीएसपी ने संतुलन बनाते हुए तीनों सीटों पर अलग-अलग जाति के प्रत्याशियों को टिकट दिया है।

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