Friday , October 19 2018

भारती में तेज़ी से बढ़ रहा है मोबाइल-वॉलेट का इस्तेमाल

money_banner1हैदराबाद। भारतीय मोबाइल-वॉलेट बाजार के वित्त वर्ष 2022 तक 190 गुना बढ़कर 1,512 अरब रुपये का हो जाने का अनुमान है। देश के अग्रणी उद्योग मंडल एसोचैम और वाणिज्यिक परामर्श कंपनी आरएनसीओएस के संयुक्त अध्ययन में यह जानकारी दी गई।

देश का मौजूदा मोबाइल-वॉलेट बाजार 1.5 अरब रुपये का है।

अध्ययन के मुताबिक, भारतीय मोबाइल-वॉलेट कारोबार में 2022 तक 160 फीसदी प्रति वर्ष की चक्रवृद्धि दर देखने को मिलेगी। 2016 में 50 करोड़ रुपये के भारतीय मोबाइल-वॉलेट कारोबार के 2022 तक बढ़कर 260 अरब रुपये का हो जाने की उम्मीद है।

स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ते उपयोग, मोबाइल इंटरनेट की बेहद तेजी से बढ़ती खपत, ई-कारोबार क्षेत्र में हो रहे विकास और आय में हो रही वृद्धि, मोबाइल-वॉलेट बाजार के विकास में योगदान देंगे।

अध्ययन में कहा गया है, “ऐसा अनुमान है कि भारतीय मोबाइल-वॉलेट कारोबार का बाजार मूल्य 200 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि दर से बढ़कर 2022 तक 275,000 अरब रुपये का हो जाएगा, जो इस समय 206 अरब रुपये का है।”

भारतीय मोबाइल-वॉलेट कारोबार का बाजार मूल्य 2013 में 10 अरब से 20 गुना बढ़कर 2016 में 206 अरब का हो चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “नोटबंदी से भारतीय मोबाइल-वॉलेट बाजार को अत्यधिक लाभ मिला है और मोबाइल के जरिए होने वाले कुल भुगतान में मोबाइल-वॉलेट की हिस्सेदारी इस समय जहां 20 फीसदी है, वहीं 2022 तक इसके बढ़कर 57 फीसदी हो जाने की उम्मीद है।”

एसोचैम के महासचिव जी. एस. रावत, आरएनसीओएस के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शुश्मुल माहेश्वरी और एसोचैम की साइबर एवं नेटवर्क सुरक्षा राष्ट्रीय परिषद के चेयरमैन बाबू लाल जैन ने मंगलवार को ‘एम-वॉलेट : सिनैरियो पोस्ट डीमोनेटाइजेशन’ शीर्षक वाले इस अध्ययन को रीलीज किया।

इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि नोटबंदी के बाद खुदरा वस्तुओं की खरीदारी में मोबाइल-वॉलेट के औसत इस्तेमाल में बेहद तेज वृद्धि दर्ज की गई। इस समय जहां वॉलेट का उपयोग कर खुदरा वस्तुओं की खरीदारी पर औसतन 500 से 700 रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं इसके जल्द ही बढ़कर 2,000 से 10,000 रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है।

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