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भारत के इन मंदिरों में कदम भी नहीं रख सकते पुरुष, न हो यकीन तो ये पढ़ें

नई दिल्ली। हाल ही में अभी सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर पर अहम फैसला सुनाया। अब इस मंदिर में हर उम्र की महिलाएं प्रवेश कर सकती है। पहले जहां 10 से 50 उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। कोर्ट ने इस बारें में कहा कि पूजा करने का अधिकार हर भक्त को है। इसलिए लिंग के आधार पर भेदभाव करना सही नहीं है। लेकिन क्या आप जानते है कि भारत में कई ऐसे भी मंदिर है जहां पर परुषों का मंदिर में प्रवेश करना वर्जित है। जानें इनके बारें में।

कामाख्या मंदिर

असम में स्थित इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान यहां पुरुषों के प्रवेश पर रोक रहती है। इस दौरान केवल महिला संत और संन्यासिन मंदिर की पूजा करती हैं।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित इस मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है। यहां के गर्भगृह में पहले महिलाओं के जाने पर रोक थी। जिसके बाद 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि महिलाओं का जाना वर्जित है तो पुरुषों के जाने पर भी प्रतिबंध लगे। इसके बाद से गर्भगृह में पुरुषों का जाना मना हो गया है।

अट्टुकल मंदिर

यह मंदिर केरल में स्थित है। यहां पर केवल महिलाएं ही पूजा कर सकती है। पोंगल के त्योहार में यहा सबसे ज्यादा महिलाएं भाग लेती है। यहां तीस लाख महिलाओं ने एक साथ भाग लेकर गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाया था।

चक्कूलाथूकावु मंदिर

केरल के इस मंदिर में मां भगवती की पूजा की जाती है। यहां पर हर साल नारी पूजा नामक अनुष्ठान किया जाता है। जिसमें महिलाओं की पूजा की जाती है। यह व्रत 10 दिनों तक चलता है। जिसके कारण यहां पर सिर्प महिलाएं ही अंदर जा सकती है।

मां संतोषी

मां संतोषी का व्रत केवल महिलाओं और अवविवाहित युवतियां ही रख सकती है। जिसमें उन्हें आचार या फिर कोई खट्टी चीज खाने की मनाही होती है। वैसे तो पुरुष हर दिन यहां जा सकते है। लेकिन शुक्रवार के दिन नहीं जा सकते है। क्योंकि यह दिन मां संतोषी का माना जाता है।

ब्रह्मा मंदिर

राजस्थान में बना पुष्कर मंदिर एकलौता विश्व एक ऐसा मंदिर है। जिसमें ब्रह्मा जी स्थापित है। यहां पर शादीशुदा पुरुष प्रवेश नहीं कर सकते है।

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