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पीएम मोदी के साथ हुआ इतना बड़ा धोखा जो कोई दुश्मन भी सोच नहीं सकता

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद इस साल की शुरूआत से ही 500 और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। दरअसल नोटबंदी लागू होने के बाद 500 और 1000 रुपए के नोटों को नए नोटों से बदलने के लिए सरकार ने 31 दिसंबर 2016 तक का समय ही दिया था। लेकिन अभी भी एक जगह ऐसी बताई जा रही है, जहां इस काले धन को सफेद करने का गोरखधंधा जोरों पर चल रहा था।

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दरअसल केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने नोटंबदी के बाद 17 लाख रुपए के कालेधन को बदलने में कुछ अधिकारियों की कथित रूप से मदद करने के मामले में खादी ग्रामोद्योग भवन के दो कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने 9 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच चलन से हटाए गए 17.07 लाख रुपए खादी ग्रमोद्योग के स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर के बैंक खाते में जमा किए। यह सरकार के निर्देश के खिलाफ था।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 500 और 1000 रुपए के नोट को चलन से हटाने की घोषणा के एक दिन बाद खादी ग्रामोद्योग भवन के प्रबंधक ने 9 नवंबर को एक आदेश जारी कर अपने कनाट प्लेस स्थित स्‍टोर में चलन से हटाए गए नोट स्वीकार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यह भी पाया गया कि प्रमुख खजांची संजीव मलिक और प्रदीप कुमार यादव ने नियमों का उल्लंघन करते हुए बिक्री करने वाले कैशियर से प्राप्त नए नोटों से पुराने नोटों को बदला। मलिक और यादव ने आपस में साजिश कर नए जारी नोट अपने पास रखते, जिसका उन्होंने भ्रष्ट और अवैध तरीके अपनाकर लाभ प्राप्त किया।

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