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लाख मुसीबतें आईं लेकिन शशांक को नहीं हरा पाईं

shashank-1बीटेक सेकेण्‍ड ईयर की पढ़ाई के दौरान शशांक एनडी के पिता को डॉक्‍टर ने घुटने के प्रत्‍यर्पण की सलाह दी। बुजुर्ग पिता के दर्द का इलाज अमेरिका में ही संभव था। शशांक ने कवायद शुरू की तो अमेरिकी डॉक्‍टर तक पिता के हेल्थ रिकार्ड पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हुआ। इस समस्‍या से जूझते हुए शशांक ने किसी तरह हेल्‍थ रिकार्ड भेजे और इलाज भी करवाया लेकिन उन्‍हें ये समझ आ गया कि आखिर घर से दूर इलाज कराना कितना मुश्किल काम है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक कर रहे इस लड़के ने तय कर लिया कि इस मुश्किल को वे हर हाल में आसान करेंगे।

इस समस्‍या से रोजाना दुनिया भर में हजारों-लाखों लोग जूझते हैं। शशांक को महसूस हो चुका था कि हेल्थ रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन कितना महत्वपूर्ण काम है। इसी जरूरत में उन्हें बिजनेस की संभावनायें भी नजर आईं और उन्होंने एक सॉफ्टवेयर बनाने का फैसला किया। शशांक ने अपने क्लासमेट अभिनव लाल को साथ लिया और अपनी बचत के अलावा परिवार और दोस्तों से उधार लेकर 10 लाख रुपए के साथ 2008 में बेंगलुरु में अपनी कंपनी प्रैक्टो टेक्नोलॉजी की नींव रखी। प्रैक्टो आज 600 लोगों के रोजगार का सशक्त जरिया है।

यह कंपनी हिन्‍दुस्‍तान के 35 शहरों में ही नहीं, बल्कि सिंगापुर और फिलीपींस में भी सफलता के कदम रख चुकी है। जल्‍द ही प्रैक्‍टो इंडोनेशिया, साउथ अफ्रीका, दुबई और ब्राजील में भी अपने कदम रखने जा रही है। शशांक बताते हैं, ‘2009 में प्रैक्टो को बेंगलुरु के डॉक्टर्स के बीच सर्कुलेट किया गया। देश में यह कॉन्सेप्ट नया था, ऐसे में प्रैक्टो के लिए पहला क्लाइंट हासिल करना आसान नहीं था।’ शशांक को पूरा यकीन था कि इस सॉफ्टवेयर से मिलने वाली सुविधा को काफी पसंद किया जाएगा और हुआ भी यही।

तमाम मुश्किलों के बीच अपनी शुरुआत के एक ही साल में प्रैक्टो न सिर्फ दिल्ली, चेन्नई और मुम्बई के मेडिकल प्रैक्टीशनर्स के बीच लोकप्रिय हुआ। बल्कि इन्वेस्टर्स का भी ध्यान अपनी ओर खींचने लगा। साल 2011 में प्राइवेट ईक्विटी फर्म सीक्यूइया कैपिटल ने इस वेंचर में 4 मिलियन डॉलर का निवेश किया। इस फंडिंग से शशांक ने अपने कारोबार का विस्तार बढ़ाते हुए देश के 12 शहरों में किया।

प्रैक्टो अपने सॉफ्टवेयर के जरिए डॉक्टर्स को अपनी प्रैक्टिस और मेडिकल रिकॉर्ड्स मैनेज करने और मरीजों को सही डॉक्टर की तलाश और अपॉइंटमेंट लेने में मदद करता है। आज तकरीबन 1,60,000 से ज्यादा डॉक्टर्स प्रैक्टो रे पर रजिस्टर्ड हैं। यही नहीं प्रैक्टो रे ने सिंगापुर में मार्केट शेयर के संदर्भ में सबसे बड़े ऑनलाइन क्लीनिक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के रूप में भी पहचान कायम की है।

हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रैक्‍टो के संस्थापक और सीईओ शशांक एनडी युवाओं का भी उत्‍साह बढ़ाते हैं। उनका कहना है कि युवाओं के लिए भारत के साथ-साथ एक वैश्विक सोच को भी बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। चूंकि विकासशील बाजारों की मांग में लगातार इजाफा होता जा रहा है और ऐसे में उत्पादों के निर्माण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा शून्य बना हुआ है।

शशांक का ये भी कहना है कि अगर आप अपनी पहुंच को वैश्विक स्तर तक विस्तारित करना चाहते हैं, और इस क्रम में आपके पास 18 महीनों के करीब का समय हो तो ऐसा करना समझ में आता है। कंपनी की स्थापना के दो वर्ष बाद सिंगापुर, भारत के बाहर का वह पहला देश था जहां प्रेक्टो ने विस्तार करते हुए अपने कदम रखे। शशांक कहते हैं कि बाजार बिल्कुल नया था और उनके पास गलती करने की कोई गुंजाइश भी नहीं थी। शशांक कहते हैं, ‘नए बाजार कंपनियों को बेहतर संस्थान बनने में काफी मददगार साबित होते हैं। और ऐसा तभी होता है जब नए मुल्क भी आपके लिए उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितना आपका काम।’

शशांक कहते हैं कि चूंकि हमारे अंदर ऐसे उत्पाद तैयार करने की क्षमता है जो वैश्विक बाजारों पर कब्जा करने में सक्षम हों, इसलिये हमें वैश्विक सोच जरूर रखनी चाहिये। इंटरनेट आधार का करीब-करीब दो तिहाई हिस्सा विकासशील बाजारों के अंतर्गत आता है, और उनके पास ऐसे उत्पाद नहीं हैं जो देश की मदद कर सकें।

रोचक बात यह भी है कि ब्राजील, फिलिपींस और इंडोनेशिया जैसे विकासशील देशों के लोग विकसित देशों के मुकाबले मोबइल-फर्स्ट रणनीति के प्रति ज्यादा खुली सोच रखते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक यह संख्या लगभग बराबर थी लेकिन अब विकासशील देशों में रुचि चार गुना ज्यादा बढ़ चुकी है। वे आगे कहते हैं कि, ‘‘यह हिस्‍सा विकासशील देशों में काफी अधिक है और इसी वजह से इन बाजारों को अब किसी भी सूरत में और अधिक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’

साभार : puridunia.com

 

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