Saturday , November 23 2019

सबसे बड़ा खुलासा, अगर कांग्रेस नेता फोतेदार ऐसा न करते तो आडवाणी ही होते पीएम

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माखन लाल फोतेदार नहीं रहे। वे इंदिरा गांधी के विश्वस्त पात्रों में से एक थे। उनका संबंध विपक्षी पार्टी के नेताओं से भी काफी अच्छा माना जाता था। उन्होंने कहा था कि 1996 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ही पीएम पद के उम्मीदवार होते, लेकिन किसी की साजिश के कारण उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा। तब आडवाणी को अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आगे करना पड़ा।

Also Read : इस चुनाव में कांग्रेस ने किया बीजेपी का सफाया, हालत देख रह जाएंगे हैरान

इसकी चर्चा फोतेदार ने अपनी किताब द चिनार लीव्स में की है। उन्होंने लिखा है कि 1996 में होने वाले आम चुनाव में यह तय था कि आडवाणी ही पार्टी की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार होंगे। लेकिन 1995 में मुंबई में भाजपा की बैठक में अचानक ही आडवाणी (तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष) ने अपने संबोधन में अबकी बारी अटल बिहारी कहकर सबको चौंका दिया। खुद वाजपेयी भी चौंक गए। वाजपेयी ने पूछा- आडवाणी जी, आप हमसे तो कम से कम पूछ लेते। आडवाणी ने कहा कि अगर मैं ऐसा करता, तो क्या आप तैयार होते।

Also Read : हार सकती है बीजेपी, यहां कांग्रेस को मिल गया सबसे तगड़ा सीएम कैंडिडेट

फोतेदार लिखते हैं कि इस निर्णय तक पहुंचने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। क्योंकि वे (फोतेदार और आडवाणी दोनों) पीवी नरसिंह राव को नापसंद करते थे। जैन हवाला डायरी में अपना नाम आने की वजह आडवाणी नरसिंह राव को ही जिम्मेवार मान रहे थे। उस समय यह लगभग तय था कि भाजपा की ओर से आडवाणी ही उम्मीदवार होंगे। उनकी लोकप्रियता ऊफान पर थी। लेकिन जैन डायरी ने उनकी छवि को धूमिल किया था। आडवाणी ने लोकसभा सदस्यता छोड़ दी। कसम खाया कि जब तक बेदाग साबित नहीं हो जाते, तब तक संसद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस बीच आम चुनाव आ गया। राव ने फोतेदार जैसे सोनिया गांधी के वफादार नेताओं को साइड लाइन कर दिया था।

Also Read : गुजरात में कांग्रेस ने उठाया सबसे बड़ा कदम, गहरे संकट में आई बीजेपी

फोतेदार ने अपनी किताब में लिखा है कि वे यह नहीं चाहते थे कि आडवाणी मजबूत हों या फिर भाजपा मजबूत हो। लिहाजा उन्होंने भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता केएल शर्मा से विस्तार से चर्चा की। इस चर्चाक्रम में फोतेदार ने शर्मा को बताया कि आप आडवाणी के पास जाइए। और उनसे कहिए, कि आपकी छवि कट्टर नेता की है। लिहाजा जनता के बीच स्वीकार्यता चाहते हैं तो वाजपेयी जैसे उदार नेता को आगे कीजिए। वे नेहरू की परंपरा के नेता माने जाते हैं। ऐसा करने पर ही भाजपा सत्ता में आ सकती है।

Also Read : अटल बिहारी वाजपेई ने मोदी से कहा- ‘खा-खाकर मोटे हो रहे हो, अब दिल्‍ली छोड़ो’

फोतेदार लिखते हैं कि इसके पीछे उनकी सोच ये थी कि वाजपेयी से तो निपटा जा सकता है, लेकिन आडवाणी से निपटना मुश्किल होगा। आखिरकार वही हुआ। आडवाणी ने 1995 में मुंबई में पार्टी की बैठक में वाजपेयी के नाम का ऐलान कर दिया।

Courtesy : hindi.eenaduindia.com

loading...