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Breaking : देश के सबसे बड़े घोटाले में कोर्ट ने दिया चौंकाने वाला फैसला, सभी आरोपी बरी

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े 2G घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ओ.पी.सैनी ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर दोनों मामलों में बरी कर दिया।

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कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनिमितता हुई थी, जिसका 2010 में कैग की रिपोर्ट के बाद व्यापक स्तर पर खुलासा हुआ। फैसला सुनाए जाते समय राजा और कनिमोझी पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद थे। उधर, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह उनकी नैतिक जीत है।

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बता दें कि कोर्ट के फैसले से पहले परिसर में भारी भीड़ थी। जज सैनी ने भीड़ के चलते आरोपियों के कोर्ट न पहुंच पाने के चलते कार्यवाही स्थगित कर दी। फिर जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने अपने एक लाइन के फैसले में कहा कि सरकारी वकील आरोप साबित करने में नाकाम रहे हैं। इस दौरान कनिमोझी और ए राजा के समर्थक कोर्ट में मौजूद रहे। फैसला आते ही कोर्ट में तालियां बज उठी।

इससे पहले सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर और मुख्य आरोपी ए. राजा को ‘बड़ा झूठा’ बताया था जबकि राजा ने सभी एजेंसियों को ‘अंधे इंसान’ कहते हुए कहा था कि वे छूकर हाथी की व्याख्या कर रहे हैं। CBI ने राजा को सबसे बड़ा आरोपी बताया था जिसने अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस बांट दिए।

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2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर इसे बांटा गया था। इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। ये भी बताया गया था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी।

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