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film Review : ‘द गाजी अटैक’ 1971 के समय की अनसुनी कहानी को कर रही है बयां

1-1486557417भारत और पाकिस्तान दो ऐसे देश हैं जिनके बीच जंग अक्सर किसी न किसी बात को लेकर छिड़ी रहती है। दोनों ही देशो के बीच अब तक कई लड़ियाँ हो चुकी हैं, जिनके बारे में आप सबको पता है। लेकिन एक लड़ाई ऐसी है जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते है। समंदर के अंदर लड़ी गयी लड़ाई पर आधारित फिल्म है ‘द गाजी अटैक’। यह लड़ाई 1971 के समय की है।

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फिल्म का नाम: ‘द गाजी अटैक’ डायरेक्टर: संकल्प रेड्डी
स्टार कास्ट: अतुल कुलकर्णी, के के मेनन, राणा डग्गुबत्ती, तापसी पन्नू, ओम पुरी, राहुल सिंह
अवधि: 2 घंटा 05 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 3।5 स्टार

जानिए कैसी है फिल्म की स्टोरी और इसमें क्या है ख़ास।।।

कहानी 
यह कहानी साल 1971 की है जब बांग्लादेश को ईस्ट पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। उस समय बांग्लादेश के बागी लोगों के ऊपर पाकिस्तान की आर्मी कड़ी कार्यवाही करती रहती थी। 17 नवम्बर को भारतीय नौ सेना के हेडक्वार्टर में खबर आती है कि पाकिस्तान की तरफ से समुन्दर के रास्ते भारत के आईएनएस विक्रांत पर एक अटैक किया जाने वाला है। नौ सेना हेड वी पी नंदा (ओम पुरी) इस बात की शिनाख्त करने के लिए ऑपरेशन ‘सर्च लैंड’ का गठन करते हैं जिसकी जिम्मेदारी एस 21 नामक पनडुब्बी के कप्तान रणविजय सिंह (के के मेनन) और लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जुन (राणा डग्गुबत्ती) के हाथ में होती है। साथ ही इस दल में देवराज (अतुल कुलकर्णी) भी मौजूद होते हैं। फिर पानी के भीतर किस तरह से एस 21, पाकिस्तान के पीएनएस गाजी पर अटैक करके उनसे मार गिराता है, इसे फिल्म के दौरान दर्शाया गया है।

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जानिए किस कारण देखेंगे आप ये फिल्म

– यह फिल्म उस अनसुनी कहानी को दर्शाती है जो शायद बहुत ही कम लोगों को पता है और डायरेक्टर राइटर संकल्प रेड्डी ने बड़े ही अनोखे अंदाज में पूरी कहानी दिखाई है। जिसमें कभी आप इमोशनल होते हैं तो कभी कुर्सी पकड़ के बैठ जाते हैं तो कभी राष्ट्र प्रेम की भावना भी जागृत होती है।

– फिल्म की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है जिसकी वजह से आप सच में पनडुब्बी के भीतर और बाहर होने वाली घटनाओं को महसूस कर पाते हैं।

– अतुल कुलकर्णी, के के मेनन जैसे उम्दा अभिनेताओं की मौजूदगी इस फिल्म को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है। वहीँ राणा दगुबत्ती और राहुल सिंह का काम भी सराहनीय है। ओम पुरी साहब ने भी हमेशा की तरह सहज अभिनय किया था हालांकि वो इस फिल्म को देख पाने से पहले ही हम सबको छोड़ कर जा चुके हैं। तापसी पन्नू का भी छोटा लेकिन अच्छा रोल है।

– फिल्म का वीएफएक्स और बैकग्राउंड स्कोर भी काबिल ए तारीफ़ है। वहीँ डायलॉग्स भी सटीक हैं।

कमजोर कड़ियां

यह फिल्म आइटम सांग्स, मसाला जोक्स और कॉमेडी से भरपूर नहीं है और कहें तो कॉमर्शियल फिल्म बिल्कुल नहीं है। यह एक्टिंग के साथ-साथ तथ्यों को जाहिर करती है जो शायद सभी के मिजाज को सही ना लगे।

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बॉक्स ऑफिस 

वैसे फिल्म में धर्मा प्रोडक्शन के साथ-साथ और भी कई प्रोड्यूसर्स ने पैसे लगाए हैं और फिल्म की शुरुआत के तीन दिनों की कमाई खास हो सकती है। वैसे अनिल थडानी ने इस फिल्म को पूरे भारत में डिस्ट्रीब्यूट किया है जो की देश के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स में से एक हैं। अब फायदे या नुकसान का पता वीकेंड के बाद ही चलेगा।

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