Thursday , September 19 2019

मिल गए संकेत, दिसंबर की शुरूआत में ही बीजेपी को लगेगा सबसे बड़ा झटका

नई दिल्‍ली। बिहार एनडीए में पिछले कई महीनों से सीट बंटवारे के मुद्दे पर रार बरकरार है। इस बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्यमंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया है। शनिवार (24 नवंबर) को मुंगेर में उन्होंने इसकी तरफ इशारा करते हुए साफ कर दिया है कि वो अपमानित होकर एनडीए में नहीं रह सकते।

समाचार चैनल न्यूज 18 के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा दिसंबर के पहले हफ्ते में यानी संसद के शीतकालीन सत्र से पहले ही एनडीए को टाटा बाय-बाय कह सकते हैं। माना जा रहा है कि छह दिसंबर को वाल्मीकि नगर में होने वाली पार्टी की बैठक में कुशवाहा खुद इसका ऐलान कर सकते हैं। बता दें कि सीट शेयरिंग को लेकर कुशवाहा ने भाजपा को 30 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया था लेकिन बिहार भाजपा प्रभारी भूपेन्द्र यादव पिछले दिनों जब बिहार आए तो उन्होंने इस तरह के किसी भी अल्टीमेटम को सिरे से खारिज कर दिया।

उधर, चर्चा है कि कुशवाहा ने अपनी आगे की रणनीति बना ली है। खबर है कि शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का राष्ट्रीय लोक समता पार्टी में विलय हो सकता है। दोनों नेताओं के बीच इस बारे में डील हो चुकी है। औपचारिक विलय के बाद उपेंद्र कुशवाहा औपचारिक तौर पर महागठबंधन में शामिल होने का ऐलान करेंगे। ऐसी स्थिति में आगामी आम चुनावों में महागठबंधन उन्हें सात सीटें दे सकता है। इससे पहले राजद की तरफ से उन्हें चार सीटों का ऑफर पहले ही मिल चुका है। कुशवाहा ज्यादा सीटों की मांग लेकर भाजपा से तोल-मोल कर रहे थे लेकिन उन्हें इसका फायदा नहीं मिल सका।

ऐसी स्थिति में कुशवाहा ने अपने धुर विरोधी सीएम नीतीश कि खिलाफ मोर्चा खोल दिया और नीच का कार्ड भी खेला। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में अलग-थलग पड़ चुके हैं। लिहाजा, वो अपने समर्थकों को भरोसा दिलाने के लिए न केवल राज्यभर में ताबड़तोड़ बैठकें कर रहे हैं बल्कि भाजपा अध्यक्ष और पीएम से मिलने की बात कहकर अपने समर्थकों को संतुष्ट करने की भी कोशिशों में जुटे हैं। ताकि महगठबंधन में शामिल होने से पहले राजनीतिक भूमिका बनाई जा सके। बता दें कि इसी साल टीडीपी और पीडीपी एनडीए से अलग हो चुकी है।

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